शनिवार, 30 मई 2009

सच बताया ये दोष मेरा था।

सच बताया ये दोष मेरा था।
ग़म उठाया ये दोष मेरा था।

दर्द से रोना चाहिये था मुझे,
मुस्कुराया ये दोष मेरा था।

सर झुकाना नहीं था मुझको जहाँ,
सर झुकाया ये दोष मेरा था।


नफ़रतों का जहान है फ़िर भी,
दिल लगाया ये दोष मेरा था।

 

दोस्तों के भी दुश्मनों के भी,
काम आया ये दोष मेरा था।


यार रूठे न 'अनघ' इस खातिर,
सब लुटाया ये दोष मेरा था। 

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शनिवार, 16 मई 2009

गीत/प्रसन्नवदन चतुर्वेदी/वैसे तो दुनिया में अक्सर

वैसे तो दुनिया में अक्सर,सूरत की कीमत होती है।
लेकिन सबसे अच्छी सूरत,इन्सान की सीरत होती है।


कभी तन सुन्दर मिल जाता है तो मन सुन्दर ये नहीं होता,
कभी मन सुन्दर जो होता है तो तन सुन्दर ये नहीं होता,
झूठी ये बात नहीं अक्सर, ये बात हकीकत होती है........
हाँ हाँ सबसे अच्छी सूरत,इन्सान की सीरत होती है........


शोहरत भी मिलती है जो अगर मन के ही अच्छे होने से,
सच्ची खुशियाँ भी मिलती हैं मन के ही सच्चे होने से,
दौलत दुनिया की सबसे बड़ी मन की ये मिल्कियत होती है..
सबसे अच्छी सूरत यारों इन्सान की सीरत होती है...........


जीवन अच्छा जो बिताना हो औरों को कभी न सताना तुम,
हो सके तो खुद पर भी हंसकर औरों को खूब हँसाना तुम,
जीवन अच्छा कट जाता है जब अच्छी नीयत होती है.....
अच्छी सबसे अच्छी सूरत,इन्सान की सीरत होती है.........

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गुरुवार, 14 मई 2009

सबसे प्यारा है महबूब का गम

शहर से बाहर होने के कारण मैं ४-५ दिन विलम्ब से आप को नई रचना दे रहा हूँ।आशा है आप इस देर को माफ़ करेंगे......

सबसे प्यारा है ये महबूब का ग़म। 

सबसे न्यारा है ये महबूब का ग़म।

ग़म की दुनिया का इक चमकता हुआ, 

इक सितारा है ये महबूब का ग़म। 

जिन्दगी ये वीरान जीने को, 

इक सहारा है ये महबूब का ग़म। 

और सब ग़म तो भंवर जैसे हैं, 

बस किनारा है ये महबूब का ग़म। 

और कुछ भी मुझे गंवारा नहीं, 

बस गंवारा है ये महबूब का ग़म। 

सारी दुनिया चलो तुम्हारी है, 

जो हमारा है ये महबूब का ग़म।

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रविवार, 3 मई 2009

गीत/प्रसन्नवदन चतुर्वेदी/कुछ हमसे सुनो कुछ....

कुछ हमसे सुनो कुछ हमसे कहो। 

चाँदनी रात है, ऐसे चुप ना रहो।  

 

बडी़ मुश्किल से फ़ुरसत के पल आते हैं, 

होके चुप इन पलों को न जाया करो; 

प्यार के इस समुन्दर में आओ बहो...... 

चाँदनी रात है, ऐसे चुप ना रहो............  

 

हर जगह भीड़ है हर जगह लोग हैं, 

ऐसी तनहाई मिलती है जल्दी नहीं; 

जहाँ कोई न हो जहाँ कोई न हो........ 

चाँदनी रात है, ऐसे चुप ना रहो............ 

 

लब अगर बात करने से कतरा रहे, 

बात करने की तरकीब यूं सीख लो; 

अपनी नज़रों से मेरी नज़र में कहो...... 

चाँदनी रात है, ऐसे चुप ना रहो............

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तू मुझको याद रखना,मेरी बात याद रखना

तू मुझको याद रखना,मेरी बात याद रखना।
गुजरे जो खूबसूरत , लम्हात याद रखना।


बादल बरसने वाले ,आँखों में जब भी छाए;
मेरे साथ भींगने की,बरसात याद रखना।


तुमसे जुदा हो जाऊं,मैं कब ये चाहता था;
काबू में नहीं होते ,हालात याद रखना।


ग़मगीन तुम न होना,कभी इन जुदाइयों से;
मैं हूँ तुम्हारे दिल में तेरे साथ याद रखना।


नहीं आ सकूंगा मैं तो,तेरे पास ग़म न करना,
तू अपने मुहब्बत की, सौगात याद रखना।


मेंहदी लगी न तुझको,सेहरा न मैंने बाँधा;
तो क्या हुआ यादों की,बारात याद रखना।