आसुँओं से आँखों को भिगोना पड़ा।
जैसे सावन की ये घटाएं सिर्फ़ बरसना जानें,
अंखिया बरसे दिल की हसरत को ये ना पहचाने,
चाहा था पाना जिसको खोना पड़ा ...................
दिल की मेरी सारी बातें रह गयीं मेरे दिल में,
तनहाई ले आयी मुझको ग़म से भरे महफ़िल में,
हर इक खुशी से हाथ मुझको धोना पड़ा ...........
रही बराबर दूरी हरदम मंजिल और कदम की,
पूरे जीवन रहीं बहारें ग़म से भरे मौसम की,
सर पे इतना बोझ गमों का ढोना पड़ा ...........
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