शनिवार, 15 अगस्त 2015

भारत माँ के बच्चे हम.....

आज स्वतंत्रता दिवस पर देशभक्ति पर एक बाल-कविता प्रस्तुत है....

भारत माँ के बच्चे हम, करें राष्ट्र का अभिनन्दन । 
न-मन-धन सब इस पर वारें, भारत माँ का करें वंदन 

हम सब इसके प्यारे तारे, ये है अपना नील गगन, 
मिल-जुलकर हम करें जतन यह बन जाए सुन्दर उपवन
महकाएं अपनी सुगंध से इस दुनिया का हर गुलशन.…
भारत माँ के बच्चे हम, करें राष्ट्र का अभिनन्द.…

कोई विवेकानंद है हम में कोई झांसी की रानी,
कल्पना, चाणक्य बनेंगे हमने मन में है ठानी,
भाभा और कलाम हमीं में, प्रेमचंद, तुलसी, रहिमन.…
भारत माँ के बच्चे हम, करें राष्ट्र का अभिनन्द.….

हम अनुशासनप्रिय सेनानी,सच्चाई केअनुगामी,
माता-पिता, गुरु के हाथों ये मशाल हमने थामी, 
विद्यालय से सीखा हमने मात-पिता को करे नमन.… 
भारत माँ के बच्चे हम, करें राष्ट्र का अभिनन्द.…. 
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यह रचना मैंने एक स्कूल के लिए लिखा था, जिसमें भारत माँ की जगह स्कूल के नाम का short form प्रयुक्त किया गया है.....

मंगलवार, 17 फ़रवरी 2015

जा रहा है जिधर बेखबर आदमी

मैं प्रस्तुत रचना का संपादित प्रारूप प्रस्तुत कर रहा हूँ | आशा है इसका नया प्रस्तुतिकरण आपको पसंद आयेगा......
आप से अनुरोध है कि आप मेरे Youtube के Channel पर भी Subscribe और Like करने का कष्ट करें ताकि आप मेरी ऐसी रचनाएं पुन: देख और सुन सकें |

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रविवार, 25 जनवरी 2015

मेरे सपनों का भारत ऐसा भारत हो तो बेहतर हो

गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक देशभक्ति गीत प्रस्तुत है | सभी ब्लॉगर बन्धुओं को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं....आप इसे YOUTUBE पर सुन सकते है.....

सभी आगे बढ़े बढ़ते रहें ये ही निरंतर हो।
न लड़का कम किसी से हो न लड़की कोई कमतर हो।
न हो बेरोजगारी और अब कोई न हो अनपढ़,
मेरे सपनों का भारत ऐसा भारत हो तो बेहतर हो ।


न हों अब धर्म के झगड़े न हो अब जाति की बातें,
न दंगे हों कहीं पर भी न हों आतंक की घातें ,
कहीं भी हम कभी भी जा सकें तो भय रहित जाएं,
सुरक्षित दिन हमारा हो सुरक्षित रात भी हर हो ।
मेरे सपनों का भारत ऐसा भारत हो तो बेहतर हो।

हरेक चेहरे पे हो मुस्कान न कोई गमजदा अब हो,
न आलस, झूठ, भ्रष्टाचार, बेईमानी यहाँ अब हो,
कोई भी गिर पड़े तो मिल के हम उसको उठा लेंगे,
सभी के दिल में ही सहयोग का अब भाव गोचर हो।
मेरे सपनों का भारत ऐसा भारत हो तो बेहतर हो।

दिलों को जोड़ लेंगे हम, गमों को छोड़ देंगे हम,
जरूरत गर पड़ी तो रास्तों को मोड़ देंगे हम,
पड़ोसी मुल्क जो भी अब हमें आँखें दिखाएगा,
तो ऐसा हो भी सकता है कि वो भारत के अन्दर हो।
मेरे सपनों का भारत ऐसा भारत हो तो बेहतर हो।

न आँसू आँख में आये, न कोई दृष्टि कातर हो,
न अब इंसान और इंसान में अब कोई अंतर हो,
सभी का लक्ष्य बस भारत को अब आगे बढ़ाना हो,

सभी  के पास भारत माँ के कुछ प्रश्नों का उत्तर हो ।
मेरे सपनों का भारत ऐसा भारत हो तो बेहतर हो।

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गुरुवार, 25 दिसंबर 2014

मेरी बहन हर्षिता का शुभ विवाह (1-12-2014)

दिनांक २८-११-१४ को मेरी बहन हर्षिता का engangement और १-१२-१४ को विवाह संपन्न हुआ जिसके कुछ फोटो प्रस्तुत हैं :-

 



रविवार, 26 अक्टूबर 2014

आंधियाँ भी चले और दिया भी जले

मित्रों ! एक रचना अपनी आवाज़ में  प्रस्तुत कर रहा हूँ, आशा है आप को अवश्य पसंद आयेगी...
इस रचना का वास्तविक आनंद Youtube पर सुन कर ही आयेगा, इसलिए आपसे अनुरोध है कि आप मेरी मेहनत को सफल बनाएं और वहां इसे जरूर सुनें...



आंधियाँ भी चले और दिया भी जले ।
होगा कैसे भला आसमां के तले ।

अब भरोसा करें भी तो किस पर करें,
अब तो अपना ही साया हमें ही छले ।

दिन में आदर्श की बात हमसे करे,
वो बने भेड़िया ख़ुद जंहा दिन ढले ।

आवरण सा चढ़ा है सभी पर कोई,
और भीतर से सारे हुए खोखले ।

ज़िन्दगी की खुशी बांटने से बढ़े ,
तो सभी के दिलों में हैं क्यों फासले ।

कुछ बुरा कुछ भला है सभी को मिला ,
दूसरे की कोई बात फ़िर क्यों खले ।
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कृपया आप यहाँ अवश्य पधारें :-

श्री रामदरश मिश्र जी की एक कविता/कंचनलता चतुर्वेदी