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सोमवार, 31 अगस्त 2020

ग़ज़ल : हमारा दिल बहुत सहमा हुआ है

हमारा दिल बहुत सहमा हुआ है |

किसी से क्या बताएं क्या हुआ है |

 

निकलना फिर घरों से रुक गया है,

शहर में फिर कहीं दंगा हुआ है |

 

सभी सम्भ्रान्त अन्धे हो गए हैं,

व्यवस्थाओं का रुख बहरा हुआ है |

 

तरक्की हो रही है फाइलों में,

हकीकत में शहर ठहरा हुआ है |

 

किसी पर जब यकीं हम दिल से करते,

हमारे साथ तब धोखा हुआ है |

 

तुम्हीं अहसास के मारे नहीं हो,

हमारे साथ भी ऐसा हुआ है |

 

हवा में जहर है पानी भी दूषित,

तरक्की का सिला इतना हुआ है |

 

‘अनघ’ सब चीर हरते द्रौपदी की,

दु:शासन कब भला नंगा हुआ है |

Copyright@PBChaturvedi

रविवार, 12 अप्रैल 2020

पंचकवि-चौरासी घाट : प्रसन्नवदन चतुर्वेदी : गोला घाट

पंचकवि-चौरासी घाट : प्रसन्नवदन चतुर्वेदी : गोला घाट


पंचकवि-चौरासी घाट : प्रसन्नवदन चतुर्वेदी : बद्रीनारायण-त्रिलोचन घाट

पंचकवि-चौरासी घाट : प्रसन्नवदन चतुर्वेदी : बद्रीनारायण-त्रिलोचन घाट


इस गए साल ने हमसे ऐसा किया : पंचकवि-चौरासी घाट : हनुमानगढ़ी घाट

दोस्तों, अपनी यह रचना जो पंचकवि-चौरासी घाट कार्यक्रम में हनुमानगढ़ी घाट पर प्रस्तुत किया था, यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ.....

इस गए साल ने हमसे ऐसा किया |
कुछ बुरा कर गया कुछ तो अच्छा किया |

हमने सोचा बहुत पा सके सब नहीं,
मन की इच्छा में यूं रह गई कुछ कमी |
वक्त की चाल पे क्यों भरोसा किया........

बेटी-बेटे गए अगले दर्जे में अब,
कुछ इजाफा हुआ फिर से कर्जे में अब,
काम-धंधे ने यूं बेसहारा किया..........

कुछ नए लोग जीवन में हमसे मिले,
बढ़ गए कुछ पुरानों के शिकवे गिले,
बात बढ़ने से उनसे किनारा किया......

गम ख़ुशी के कई जाम पीते रहे,
इक नई आस में हम तो जीते रहे,
कुछ भला आगे होगा ये सोचा किया....

कुछ पुराने थे अपने, बिछड़ भी गए,
हम कई बार तनहा से पड़ भी गए,
फिर संभलकर न्य इक इरादा किया......

साल जो आएगा वो ख़ुशी लाएगा,
दूर गम होंगे लब पर हंसी लाएगा,
वक्त ने हमसे ऐसा इशारा किया......