शुक्रवार, 10 सितंबर 2021

न्यायालय में न्याय नहीं है

न्यायालय में न्याय नहीं है |
दूजा और उपाय नहीं है |
 
मत बाँधो इसको खूंटे से,
बेटी है ये गाय नहीं है |
 
मोमबत्तियां जला रहे हैं,
न्याय भरा समुदाय नहीं है |
 
निर्भयता से बेटी रह ले,
ऐसी एक सराय नहीं है |
 
नेताओं की पुस्तक में क्यों,
सच जैसा अध्याय नहीं है |
 
दौलत नित बढ़ती पर कहते,
राजनीति व्यवसाय नहीं है |
 
खर्चे पर खर्चे करते हैं,
लेकिन कोई आय नहीं है |
 
सच, ईमान जहाँ सब सीखें,
जग में वो संकाय नहीं है |
 
अपराधी फल-फूल रहे हैं,
क्या अब लगती हाय नहीं है ?
 
जब अखबार नहीं; लगता है,
आज सुबह की चाय नहीं है |
 
जयचन्दों से देश भरा है,
कोई पन्ना-धाय नहीं है |
 
प्रतिभाओं का वंचित रहना,
क्या ये भी अन्याय नहीं है ?
 
तेरी-मेरी, इसकी-उसकी,
मिलती ‘अनघ’ क्यों राय नहीं है | 
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शनिवार, 22 मई 2021

मुझे कुछ-कुछ सुनाई दे रहा है

मुझे कुछ-कुछ सुनाई दे रहा है |

कहीं कोई दुहाई दे रहा है |

 

अगर तूने नहीं गलती किया तो,

बता तू क्यों सफाई दे रहा है |

 

तुम्हारे क़ैद में महफूज रहता,

मुझे तू क्यों रिहाई दे रहा है |

 

दिखाया जा रहा जो कुछ छिपाकर,

वही हमको दिखाई दे रहा है |

 

उसी से प्यार मुझको हो गया है,

मुझे जो बेवफाई दे रहा है |

 

जहन्नुम में जगह खाली नहीं नहीं है,

भले को क्यों बुराई दे रहा है |

 

न अब परिवार में कुछ पल बिताना,

ये रिश्तों में ढिठाई दे रहा है |

 

बहुत मुश्किल घड़ी है वक्त हमको,

कुआँ इक ओर खाई दे रहा है |

 

सियासत का सबक यारों में मुझको,

मुसलमाँ, सिख, ईसाई दे रहा है |

 

मिले हम खुश हुए लेकिन ये गम है,

ये मिलना कल जुदाई दे रहा है |

 

सही लिखने का जज्बा है ‘अनघ’ जो,

कलम को रोशनाई दे रहा है |

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सोमवार, 31 अगस्त 2020

ग़ज़ल : हमारा दिल बहुत सहमा हुआ है

हमारा दिल बहुत सहमा हुआ है |

किसी से क्या बताएं क्या हुआ है |

 

निकलना फिर घरों से रुक गया है,

शहर में फिर कहीं दंगा हुआ है |

 

सभी सम्भ्रान्त अन्धे हो गए हैं,

व्यवस्थाओं का रुख बहरा हुआ है |

 

तरक्की हो रही है फाइलों में,

हकीकत में शहर ठहरा हुआ है |

 

किसी पर जब यकीं हम दिल से करते,

हमारे साथ तब धोखा हुआ है |

 

तुम्हीं अहसास के मारे नहीं हो,

हमारे साथ भी ऐसा हुआ है |

 

हवा में जहर है पानी भी दूषित,

तरक्की का सिला इतना हुआ है |

 

‘अनघ’ सब चीर हरते द्रौपदी की,

दु:शासन कब भला नंगा हुआ है |

 

किसी को क्या बताएं क्या हुआ है |

हमारा दिल बहुत सहमा हुआ है

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