Thursday, October 31, 2013

जब भी जली है बहू जली है- दहेज़ पर एक रचना

मित्रो, आज आप के लिए दहेज़ पर एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ | आप ने अक्सर देखा होगा जब भी ऐसी कोई खबर आती है तो उसमें सिर्फ बहू जलती है और वह भी तब जब कोई नहीं रहता, सभी जलने के बाद ही पंहुचते है | ख़ास तौर से सीधी-साधी बहुओं के साथ ये ज्यादा होता है | काश ! लोग सभी को इंसान समझते...

जब भी जली है बहू जली है सास कभी भी नहीं जली है |
जब भी जली सब दूर रहे हैं पास कभी भी नहीं जली है |

जितना भी मिलता जाता है उतना ही कम लगता है,
और मिले कुछ और मिले ये आस कभी भी नहीं जली है |

हम हिन्दू तो मरने पर ही लाश जलाया करते हैं,
वो जीते-जी जली है उसकी लाश कभी भी नहीं जली है |

कभी-कभी कुछ ऐब भी अक्सर चमत्कार दिखलाते हैं,
सीधी-साधी जल जाती बिंदास कभी भी नहीं जली है |

इस रचना को यू-ट्यूब जरुर पर सुनिए- 

Sunday, October 27, 2013

एक संगीतमय बाल कविता

मित्रों ! अपने पुत्र का एक संगीतमय बाल-कविता पाठ प्रस्तुत कर रहा हूँ-