Friday, October 23, 2015

दो गज़लें.....

अपनी दो गज़लें  आप की नज़र कर रहा हूँ | आशा है आप अवश्य पसंद करेंगे.....
                        (१)
ज़िन्दगी जीना बहुत दुश्वार है |
जिसको देखो हाथ में तलवार है |

लूटकर वो पूछने आये हैं हाल,
दोस्तों का अब यही व्यवहार है |
देवता लगता है कोई आदमी,
कोई तो शैतान का अवतार है |
ज़िन्दगी चलती रही तो ज़िंदगी,
रुक गयी तो मौत की दीवार है |
बेटियाँ लाठी बने जब बाप की,
तब सुरक्षित जानिए संसार है |
सारी दुनिया ये मिसाइल दागती,
प्यार हिंदुस्तान का हथियार है |
                  (२)
कुछ बुरे हैं कुछ भले किरदार हैं |
इस जहाँ में फूल हैं कुछ खार हैं |

आप कीचड़ में न पत्थर फेकिए,
राजनीतिक चोट के आसार हैं |
कम पढ़े जो काम करते हैं बहुत,
जो पढ़े हैं काम से लाचार हैं |
चैन से वो झोपड़ी में सो गए,
जागते वो,जिनके बंगले,कार हैं |
मृग ने शावक से कहा जाना नहीं,
उस तरफ इंसान हैं, खूंखार हैं |
असलियत में मित्र कोई भी नहीं,
फेसबुक पर सैकड़ों हैं, हज़ार हैं |
जोड़ने को जब बहुत से एप्स हैं,
तब बिखरने क्यों लगे परिवार हैं | 
( काव्योदय के फ़िलबदीह 140 से हासिल )

आप सभी को दशहरा की शुभकामनाएं....