Friday, August 10, 2012

दर्शन दो प्रभु कबसे खड़े हैं


आप सभी को भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव की बहुत-बहुत बधाई। आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर मैं अपना लिखा एक भजन प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह भजन पहले लिखित रूप में आप तक पहुँच चुका है, आज अपनी आवाज़ मे आप तक पहुँचा रहा हूँ...


दर्शन दो प्रभु कबसे खड़े हैं।
हम भारी विपदा में पड़े हैं।

कोई नहीं प्रभु-सा रखवाला,
मेरे कष्ट मिटाने वाला,
जीवन में कर दीजै उजाला;
आप दयालू नाथ बड़े हैं.......

झूठी माया झूठी काया,
लेकर मैं दुनिया में आया,
दुनिया में है पाप समाया;
भरते पाप के रोज़ घड़े हैं........

पाप हटे मिट जाये बुराई,
सबमें पडे़ प्रभु आप दिखाई,
इच्छाओं ने दौड़ लगाई;
कितनी गहरी मन की जड़े है.......

15 comments:

  1. बहुत अच्छा गाया है आपने प्रसन्न वदन जी।..बधाई।

    भजन की एक पंक्ति पर आपत्ति दर्ज हो...

    झूठी माया झूठी काया
    लेकर मैं दुनियाँ में आया।

    न माया झूठी लेकर आया न काया झूठी लेकर आया। बिन माया के, निर्मल काया लेकर मैं दुनियाँ में आया। झूठी माया ने काया को इस दुनियाँ में आने के बाद ही झूठा साबित कर दिया।:(

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    1. बहुत सुन्दर भजन...
      आपको बहुत सारी शुभकामनाएं...

      (देवेन्द्र जी की बात सच है,कृष्ण को कैसे झुठलाएं भला?....)
      सादर
      अनु

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  2. बहुत ही सुन्दर भजन है..
    जन्माष्टमी की शुभकामनाये
    :-)

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  3. प्रभुमिलन की व्याकुलता स्पष्ट दिखाई दे रही है इस भजन में ...मनोहारी प्रस्तुतिकरण
    वैसे देवेन्द्र जी की बात पर भी गौर किया जाना चाहिये

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  4. बहुत बेहतरीन सुंदर प्रस्तुति,,,,

    श्री कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ
    RECENT POST ...: पांच सौ के नोट में.....

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  5. खूबसूरत भजन...आपकी आवाज़ ने उसे मुखरित कर दिया...

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  6. बहुत ही सुंदर जी !

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

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  8. ्वाह: बहुत ही सुन्दर भजन..

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  9. सुन्दर बोल उससे भी सुन्दर आवाज . बहुत खूब ....

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  10. बहुत ही उम्दा छंदमय कविता |ब्लॉग पर आने हेतु आभार |

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  11. बहुत ही भाव-प्रवण कविता। मेरे ब्लॉग " प्रेम सरोवर" के नवीनतम पोस्ट पर आपका स्वागत है।

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