Tuesday, April 14, 2009

गीत/चाहा था हँसना हमको

चाहा था हँसना हमको रोना पडा़ ।
आसुँओं से आँखों को भिगोना पडा़।

जैसे सावन की ये घटाएं सिर्फ़ बरसना जानें,
अंखिया बरसे दिल की हसरत को ये ना पहचाने,
चाहा था पाना जिसको खोना पडा़ ...................

दिल की मेरी सारी बातें रह गयीं मेरे दिल में,
तनहाई ले आयी मुझको ग़म से भरे महफ़िल में,
हर इक खुशी से हाथ मुझको धोना पडा़ ...........

रही बराबर दूरी हरदम मंजिल और कदम की,
पूरे जीवन रहीं बहारें ग़म से भरे मौसम की,
सर पे इतना बोझ गमों का ढोना पडा ...........