Sunday, May 3, 2009

गीत/प्रसन्नवदन चतुर्वेदी/कुछ हमसे सुनो कुछ....

कुछ हमसे सुनो कुछ हमसे कहो।
चाँदनी रात है, ऐसे चुप ना रहो।


बडी़ मुश्किल से फ़ुरसत के पल आते हैं,
होके चुप इन पलों को न जाया करो;
प्यार के इस समुन्दर में आओ बहो......
चाँदनी रात है, ऐसे चुप ना रहो............


हर जगह भीड़ है हर जगह लोग हैं,
ऐसी तनहाई मिलती है जल्दी नहीं;
जहाँ कोई न हो जहाँ कोई न हो........
चाँदनी रात है, ऐसे चुप ना रहो............


लब अगर बात करने से कतरा रहे,
बात करने की तरकीब यूं सीख लो;
अपनी नज़रों से मेरी नज़र में कहो......
चाँदनी रात है, ऐसे चुप ना रहो............